मुनि इंटरनेशनल स्कूल दे रहा है भारत-जापान संबंधों को नया आयाम : केंजी हिरामात्सू
New Delhi: Fri, 24 Aug 2018 20:17, by: Rajesh Sharma

नई दिल्ली - दिल्ली के मोहन गार्डन स्थित मुनि इंटरनेशनल स्कूल में पहुंचे जापान के एंबेस्डर केंजी हिरामात्सू ने कहाकि मुनि इंटरनेशनल स्कूल भारत-जापान संबंधों को नया आयाम दे रहा है। डॉ. अशोक कुमार ठाकुर द्वारा स्थापित मुनि स्कूल में आधुनिक शिक्षा के साथ मानव मूल्यों व संस्कारों का दिया जाना सार्थक होता दिख रहा है। ये विचार  जापान एंबेस्डर केंजी हिरामात्सू  ने स्कूल में आयोजित जापानी पुस्तक भेंट समारोह के दौरान कहे, उन्होंने कहाकि भारत-जापान की संस्कृति में काफी समानताएं है, दोनों देशों की दोस्ती काफी पुरानी है। इस दोस्ती को नई पीढी़ और मजबूत करे तो दोनों देशों के लिए लाभदायक होगा। उन्होंने कहाकि जापानी भाषा सीख कर कुछ करने की चाहत रखने वाले युवाओं के लिए जापान के दरवाजे सदा खुले हैं। 

इस दौरान एंबेस्डर केंजी हिरामात्सू ने स्कूल संस्थापक डॉ. अशोक कुमार ठाकुर को "मोत्ताईनाइ दादी मां" पुस्तक भेंट की। इस पुस्तक का जापानी भाषा से हिन्दी अनुवाद किया गया। यह पुस्तक जापान में पर्यावरण संरक्षण जैसे अभियान में मुख्य भूमिका निभा रही है। स्कूल में जापानी भाषा सीखने वाले सभी छात्रों को 1111 पुस्तकें उपहार स्वरूप दी गई हैं।  इस पुस्तक में दादी मां के माध्यम से छोटे बच्चों को वस्तुओं के भरपूर सदुपयोग और गंदगी न फैलाने के बारे में समझाया गया।


छात्रों को दी गई "मोत्ताईनाइ दादी मां" की पुस्तक भारत के "स्वच्छ भारत अभियान" को और सशक्त बनाने में अहम भुमिका निभाएगी।


इस अवसर दिल्ली स्थित जयका प्रमुख मात्सू मोट्टू, पुस्तक लेखिका मारिको सिंजू , कोगा सान भी मुख्य रूप से उपस्थित हुए। स्थानीय निगम पार्षद श्याम मिश्रा, मुनि स्कूल सूरत (गुजरात) के अध्यक्ष घन्श्याम पटेल समेत स्कूली छात्रों द्वारा स्कूल आए सभी जापानी अतिथियों का पारंपरिक रूप से स्वागात किया गया।


समारोह के दौरान स्कूल संस्थापक डॉ. अशोक कुमार ठाकुर ने जापानी एंबेस्डर केंजी हिरामात्सू व दिल्ली स्थित जयका फाउंडेशन के अधिकारियों व अन्य सभी सहयोगियों का धन्यवाद करते हुए कहाकि "मोत्ताईनाइ दादी मां" की पुस्तक स्कूल छात्रों को वस्तुओं के उचित-समुचित उपयोग के बारे मे आसानी से समझाने में सफल रहेगी।  


आज जापान की तकनीक का विश्व में बोलबाला है, यदि हमारे देश के युवा जापानी भाषा सीखते हैं, तो उन्हें जापान में रोजगार के बेहतर अवसर मिलते है। डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि वो इस वक्त अपने स्कूलों के माध्यम से देश भर में 6 हजार से अधिक छात्रों को जापानी भाषा सिखा रहे हैं। मुनि स्कूल में जापानी भाषा सिखाने की शुरूआत बीते कई वर्ष पहले की गई थी। जिसके आज सार्थक परिणाम आ रहे हैं जापानी सीखने वाले 250 से अधिक छात्र निःशुल्क जापान दौरे पर जा चुके हैं। डॉ. अशोक कुमार ने भारत व जापान को एक दूसरे के उपयोगी व पूरक होने पर जोर देते हुए कहाकि यदि जापान की तकनीक भारत के युवाओं का संगम हो जाए तो दुनिया देखती रह जाएगी।

--राजेश शर्मा

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Rajesh Sharma - Reporter

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